46 वर्षीय कारोबारी गुप्ता का नाता भारत की डिफेंस और एविएशन इंडस्ट्री से गहरा ताल्लुक रखने वाले परिवार से है। पुरानी दिल्ली में बसे गुप्ता परिवार का पैतृक रूप से कपड़ों का कारोबार था, लेकिन कौन से दलालों को चुनना है सुशेन के दादा बृज मोहन गुप्ता ने एविएशन की दुनिया में कदम रखा था। गुप्ता ने कई अंतरराष्ट्रीय डिफेंस और एविएशन कंपनियों के साथ करार में रोल अदा किया था। ब्रिटिश कंपनी कौन से दलालों को चुनना है वेस्टलैंड एयरक्राफ्ट्स, प्रैट एंड विट्नी कौन से दलालों को चुनना है समेत कई दिग्गज कंपनियों के साथ गुप्ता ने डील कराई थी। बृज मोहन गुप्ता के बाद उनके बेटे देव ने भी इसे फैमिली बिजनेस के तौर पर जारी रखा और अब सुशेन मोहन गुप्ता परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं।

Twitter appoints Apurva Dalal as Director of Engineering in India.

कौन है बिचौलिया कौन से दलालों को चुनना है सुशेन मोहन गुप्ता, जिसका राफेल डील की दलाली में आया नाम

कौन है बिचौलिया सुशेन मोहन गुप्ता, जिसका राफेल डील की दलाली में आया नाम

राफेल डील में दलाली का मुद्दा एक बार फिर से भारत से लेकर फ्रांस तक में हलचल पैदा करने लगा है। रविवार कौन से दलालों को चुनना है को फ्रांस के मीडिया संस्थान मीडियापार्ट की ओर से आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राफेल डील के लिए फ्रेंच एविएशन कंपनी दसॉ ने बिचौलिये को 7.5 मिलियन यूरो की दलाली दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम फर्जी कंपनियों और नकली बिलों कौन से दलालों को चुनना है के जरिए ट्रांसफर की गई थी। इस डील में जिस बिचौलिये का नाम सामने आ रहा है, वह है सुशेन मोहन गुप्ता। सुशेन मोहन गुप्ता को लेकर एक तरफ कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उसने मामले की जांच नहीं कराई। वहीं बीजेपी का कहना है कि यूपीए सरकार के दौर में मिलीभगत से ही सुशेन मोहन ने इस काम को अंजाम दिया है।

surat news- सूरत में चीटर व्यापारियों और दलालों के कारण नकदी का व्यापार चौपट

surat news- सूरत में चीटर व्यापारियों और दलालों के कारण नकदी का व्यापार चौपट

प्रदीप मिश्रा
सूरत. कपड़ा बाजार के लिए कौन से दलालों को चुनना है कोढ़ बने चीटर व्यापारियों और दलालों ने कारोबार को भारी क्षति पहुंचाई है। इनके कारण नकदी का व्यापार चौपट हो गया है।
कुछ साल पहले तक अन्य राज्यों से सैकड़ों व्यापारी 25 हजार से एक-दो लाख रुपए तक का माल नकद खरीदने सूरत आते थे। यहां के व्यापारियों पर विश्वास होने के कारण वह किसी भी मार्केट की दुकान में इन्क्वायरी करते और माल खरीद कर ले जाते थे। अब वह कतराने लगे हैं। चीटर दलाल सालासर हनुमान गेट से कमेला दरवाजा तक के मार्केट कौन से दलालों को चुनना है के आगे खड़े रहते हैं। जैसे ही अन्य राज्यों के व्यापारी कौन से दलालों को चुनना है रिक्शा या अन्य वाहन से कौन से दलालों को चुनना है उतरते हैं, दलाल उन्हें सस्ता माल दिलाने का आश्वासन देकर व्यापारी के पास ले जाते हैं, जहां चीटर व्यापारी अच्छे कपड़े दिखाता है अन्य राज्य के व्यापारी से एडवांस पेमेंट लेने के बाद उसे 10-20 साडियां दे दी जाती हैं। बाकी साडिय़ां ट्रांसपोर्ट के माध्यम से भेजने का आश्वासन दिया जाता है। इसके बाद सस्ता और रद्दी माल भेजने का खेल शुरू हो कौन से दलालों को चुनना है जाता है।

धर्मेंद्र राठौड़ कांग्रेस-भाजपा का रजिस्टर्ड दलालः पायलट समर्थक MLA का बयान

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राजस्थान में जुबानी जंग की रौ में भाषाओं की मर्यादाएं तार तार हो रही हैं. खेमों में बंटी कांग्रेस के गहलोत बनाम पायलट समर्थक चुन चुन कर जुमलों और विवादित बोलों का इस्तेमाल कर रहे हैं (Ved Solanki On Dharmendra Rathore). गद्दार, धोखेबाज जैसे शब्दों के बाद अब रजिस्टर्ड दलाल की बारी आ गई है. इस बार पायलट खेमे के वेद सोलंकी ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ इसका प्रयोग किया है.

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