दैनिक तकनीकी विश्लेषण

एग्री कमोडिटीज सूचना सेवा

मोलतोल देश भर के सभी मुख्‍य बाजारों के डेटा और सूचनाएं जुटाती है। इसके अलावा फसल सर्वे के कार्य से भी कंपनी जुड़ी हुई है। जिन अहम फसलों पर यह कंपनी कार्य करती है, वे हैं:

*अनाज : चावल, गेहूं, मक्‍का, बाजरा, ज्‍वार और जौ।
*दलहन : चना, तुअर, उड़द, मूंग, मोठ, मटर और मसूर।
*खाद्य तेल : सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, राइसब्रान और सनफ्लावर।
*तिलहन : सरसों/रेपसीड, तारामीरा, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, सनफ्लावर और कैस्‍टरसीड।
*ऑयल मील्‍स : सरसों, सोयाबीन, मूंगफली।
*मसालें : जीरा, काली मिर्च, लाल मिर्च, हल्‍दी, धनिया, इलायची एवं अन्‍य मसालें।
*कपास : कॉटन, कॉटन सीड, कॉटन सीड केक।
*ग्‍वार: ग्‍वार, ग्‍वार गम, चूरी, कोरमा और ग्‍वार गम पावडर।
*चीनी : चीनी और गुड़।
*मेंथा : मेंथा ऑयल।

राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय समाचार/रिपोर्टस :

*दैनिक एवं साप्‍ताहिक रिपोर्टस।
*दैनिक मौसम सूचना-भारत।
*बाजार के ज्‍वलंत मुद्दे पर खास रिपोर्टस।
*राष्‍ट्रीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय कमोडिटी वायदा पर रोजाना टेक्निकल।
*भारत सरकार की खबरें एवं अधिसूचनाएं।
*भारतीय वायदा बाजार से जुड़ी सूचनाएं।
*फसल अपडेट-बोआई पूर्व/बोआई/फसल डेवलपमेंट/परिपक्‍वता/कटाई।
*फसल की भावी भाव स्थिति।

रिसर्च रिपोर्ट

हम दैनिक, साप्‍ताहिक और मासिक रिसर्च रिपोर्ट भी उपर्युक्‍त कमोडिटीज पर उपलब्‍ध कराते हैं। रिसर्च रिपोर्ट में जिन पहलूओं को शामिल किया जाता है, वे हैं:

*खबरें और अपडेटस
*फंडामेंटल विश्‍लेषण
*तकनीकी विश्‍लेषण
*एस्‍ट्रो विश्‍लेषण
*हाजिर बाजार भाव
*बाजार आवक
*मांग-आपूर्ति अनुमान
*ट्रेड फ्लो इनफोर्मेशन
*ट्रेड-पैरिटी विश्‍लेषण
*भाव एवं फसल अनुमान

नॉन-एग्री कमोडिटीज सूचना सेवा

*बुलियन: सोना और चांदी।
*मेटल्‍स/क्रूड: एल्‍युमिनियम, जिंक, कॉपर, लेड, निकल और क्रूड ऑयल।

मोलतोल के किसी भी न्‍यूज सैक्‍शन को पढ़ने एवं ई-पेपर्स के लिए अदा किए गए शुल्‍क की किसी भी स्थिति में वापसी नहीं होगी।

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मोलतोल डॉट इन से सम्पर्क करने के लिए [email protected] या 07597464665 पर एसएमएस करें। हम आपका ईमेल या कॉल/एसएमएस मिलने पर सम्पर्क करेंगे।

पेमेंट करने के लिए हमारी बैंक डिटेल

आप हमारे बैंक खाते में भी सीधे अपना शुल्‍क जमा करा सकते हैं। आप कमोडिटी की जो भी कैटेगरी सब्‍सक्राइब करना चाहते हैं, हरेक कैटेगरी का सालाना शुल्‍क दो हजार रुपए (2000 रुपए) है। आप जितनी कैटेगरी लेना चाहते हैं उनका दो-दो हजार रुपए सालाना शुल्‍क जोड़कर बैंक खाते में जमा कर सकते हैं।

Netbanking :

MOLTOL INFO SERVICES LLP
STATE BANK OF INDIA
CURRENT ACCOUNT NO. 38271334602
IFSC : SBIN0031028
BRANCH CODE : 31028
INDUSTRIAL AREA, JHOTWARA, DISTT: JAIPUR
RAJASTHAN INDIA PIN : 302012

यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

डेली करेंट अफेयर्स के अंतर्गत अंग्रेज़ी भाषा और हिंदी के प्रमुख समाचार पत्रों, जैसे- द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, लाइव मिंट, बिज़नेस लाइन, टाइम्स ऑफ इंडिया, बिज़नेस स्टैण्डर्ड, डीएनए, PIB, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स इत्यादि में प्रतिदिन प्रकाशित महत्त्वपूर्ण समाचारों/खबरों का हिंदी भाषा में सहज विश्लेषण प्रस्तुत किया जायेगा, जो कि यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों की तैयारी में सहायता प्रदान करेगा। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इस खंड में हमने डेली न्यूज़, एडिटोरियल को शामिल किया है जिससे कि परीक्षा की दृष्टि से कोई भी महत्त्वपूर्ण खबर छूटने न पाए।

यूपीएससी के लिए दैनिक समाचार विश्लेषण

यूपीएससी करेंट अफेयर्स: दैनिक समाचार विश्लेषण

इसलिए, हम यूपीएससी करेंट अफेयर्स की तैयारी के लिए डेली न्यूज एनालिसिस सेक्शन लेकर आए हैं, जो BYJU’S की एक पहल है, जो अखबारों को पढ़ने के साथ-साथ आईएएस उम्मीदवारों को आसान और प्रभावी करंट अफेयर्स नोट्स बनाने में मदद करने के लिए एक आसान काम है।

हमारा व्यापक समाचार विश्लेषण ( सीएनए) समाचार में महत्वपूर्ण घटनाओं या मुद्दों को शामिल करता है जो UPSC Exam के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण हैं।

हमारे सीएनए के लिए समाचार पत्र से कवर किए गए मुद्दों या समाचारों को UPSC Mains syllabus के अनुसार चार सामान्य अध्ययन पेपर (जीएस पेपर I, जीएस पेपर II, जीएस पेपर III और जीएस पेपर IV) में वर्गीकृत किया गया है ।

करेंट अफेयर्स एक विशाल विषय है जिस पर उम्मीदवारों की ओर से बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इस ओर मजबूत होने के लिए, उम्मीदवारों को विभिन्न स्रोतों से दैनिक करंट अफेयर्स पर अपडेट रहना चाहिए।

यूपीएससी परीक्षा के लिए हमारा दैनिक समाचार पत्र विश्लेषण विभिन्न प्रमुख समाचार पत्रों का हवाला देकर तैयार किया जाता है जिनमें द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस स्टैंडर्ड, लाइव मिंट आदि शामिल हैं।

व्यापक समाचार विश्लेषण में IAS prelims और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए नमूना अभ्यास प्रश्न भी शामिल हैं और प्रश्नों को वर्तमान घटनाओं के आधार पर और यूपीएससी प्रश्न पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया है।

UPSC 2022 पर नवीनतम विवरण के लिए, लिंक किए गए लेख को देखें।

यूपीएससी के लिए दैनिक समाचार

हमारे व्यापक समाचार विश्लेषण (सीएनए) की मुख्य विशेषताएं: आईएएस के लिए दैनिक समाचार दैनिक तकनीकी विश्लेषण विश्लेषण

  • कवर किए गए समाचार पत्र – द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस स्टैंडर्ड और अन्य प्रमुख समाचार पत्र।
  • अतिरिक्त कवरेज – संपादकीय।
  • सामग्री तालिका – हमारे सीएनए में सामग्री की तालिका है जिसके तहत समाचार को चार श्रेणियों या सामान्य अध्ययन पत्रों में वर्गीकृत किया जाता है, अर्थात् जीएस पेपर I- कला और संस्कृति, इतिहास, भूगोल, सामाजिक मुद्दे; जीएस पेपर II – राजनीति और शासन; जीएस पेपर III- अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध; और जीएस पेपर IV – नैतिकता, अखंडता और योग्यता। प्रारंभिक और मुख्य अभ्यास प्रश्न भी दिए गए हैं।

  • फ़्रीक्वेंसी – हमारा CNA विशिष्ट संकलनों में जारी किया जाता है जिसमें UPSC के लिए दैनिक समाचार विश्लेषण, करंट अफेयर्स रिवीजन को आसान बनाने के लिए साप्ताहिक समाचार सारांश और मासिक अंक शामिल हैं।
  • प्रारूप- फ़ाइल उसी दिन डाउनलोड करने योग्य प्रारूप में प्रदान की जाती है

हमारे सीएनए से आईएएस उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • UPSC परीक्षा के लिए ‘द हिंदू’ विश्लेषण/’द हिंदू’ महत्वपूर्ण समाचार/यूपीएससी परीक्षा के लिए हिंदू दैनिक विश्लेषण
  • हमारे CNA को पढ़कर समय बचाएं और विभिन्न स्रोतों का हवाला देने से बचें
  • UPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का अभ्यास करें
  • करेंट अफेयर्स नोट्स बनाने की आसान तकनीक सीखें

BYJU’S CNA IAS की तैयारी के लिए दैनिक करंट अफेयर्स का अंतिम स्रोत है। यह वास्तव में UPSC परीक्षा के लिए सबसे अच्छी करेंट अफेयर्स साइट है।

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सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी

से मिलकर बना है जिसका अर्थ समान रूप से भेजा गया | अंग्रेजी में कम्युनिकेशन कहते हैं | सामान्य अर्थों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच विचारों , संदेशों एवं सूचनाओं का आदान - प्रदान ही संप्रेषण कहलाता है |

" संप्रेषण से तात्पर्य एक व्यक्ति के विचारों तथा सम्मतियो से दूसरे व्यक्तियों को परिचित कराने से है |"

तकनीकी-

तकनीकी का सामान्य अर्थ दैनिक जीवन में विज्ञान का प्रयोग करने की विधियों से है |

'' शिक्षण तथा अनुदेशन में आव्यूहों , प्रविधियां माध्यमों तथा मशीनों का प्रयोग करना जिससे पुस्तकालय , प्रयोगशाला तथा पाठ्य पुस्तकें अधिक प्रभावशाली हो सके |

सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी का अर्थ-

स्वयं के भाव , विचार , संदेश एवं सूचनाओं को शीघ्रातिशीघ्र तकनीकी सहायता से दूसरे व्यक्ति तक सही तरह से प्रेषित करना सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी कहलाता है |

सुचना सम्प्रेषण तकनिकी का महत्त्व-

कक्षा कक्ष के अंदर शिक्षण कार्य को अत्यधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी जनसंचार माध्यमों का प्रयोग एक उत्तम साधन है | प्राचीन काल से चली हुई आ रही शिक्षा की पद्धति में नवीन तकनीकी संसाधनों का प्रयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना एवं शिक्षा की पद्धति में नवीन परिवर्तन लाकर शिक्षा व्यवस्था को नया मुकाम देना ही लक्ष्य है |

शिक्षा के क्षेत्र में नवीन तकनीकी संसाधन जैसे दूरदर्शन वीडियो कॉन्फ्रेंस सी फिल्म प्रोजेक्टर ओवरहेड प्रोजेक्टर वैज्ञानिक एवं प्रक्षेपी यंत्रों केप्रयोग से शिक्षा व्यवस्था को परिवर्तन कर लिया है | वर्तमान में दूरस्थ शिक्षा ने बहुत ही महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है घर बैठकर शिक्षा प्राप्त करना यह सब इन तकनीकी संसाधनों के माध्यम से ही हो पाए हैं | अतः शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी लेकर आई है |

सुचना सम्प्रेषण तकनिकी की आवश्यकता-

ई अधिगम-

वर्तमान समय में सूचना एवं तकनीकी विकास से शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं एवं कंप्यूटर आधारित अधिगम का विकास हुआ है| परिणाम स्वरूप छात्रों के मानसिक एवं बौद्धिक विकास की प्रक्रिया में तीव्रता आई है| ज्ञान के भंडार का आदान प्रदान करने के लिए इंटरनेट एवं संचार वाहक एप्लीकेशन का उदय होना शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण वरदान सिद्ध हुआ है| जिसने इलेक्ट्रॉनिक अधिगम को व्यापक रूप दिया है, वर्तमान में हर प्रकार की जानकारी हर तरह की शिक्षा इंटरनेट पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से किसी भी स्थान पर, किसी भी समय, कोई सी भी जानकारी बहुत ही आसानी से प्राप्त कर सकते हैं|

अधिगम में सूचना संप्रेषण तकनीकी का महत्व एवं आवश्यकता

1. विषय का विकास ( Development of subject ) -

सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी के माध्यम से विषयगत् विकास की सम्भावना में वृद्धि होती है क्योंकि विभिन्न संचार माध्यमों से एक ही विषय पर अनेक प्रकार के तार्किक एवं चिन्तन युक्त विचार दैनिक तकनीकी विश्लेषण प्राप्त होते हैं । इनसे विषय का विकास सम्भव होता है । वर्तमान समय में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर विभिन्न विषयों का विकास एवं समाकलन सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी की देन माना जाता है ।

2. विषय की पूर्णता ( Complience of subject ) -

विषय की पूर्णता के लिये भी विचारों का एकत्रीकरण आवश्यक है । सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी एक विद्वान् , शिक्षाशास्त्री एवं मनोवैज्ञानिक के विचारों से विषयगत् पूर्णता को प्राप्त नहीं किया जा सकता । इसके लिये विभिन्न विद्वानों के विचारों की आवश्यकता होती है । इस कार्य में सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी के माध्यम से एक ही विषय पर अनेक विचार प्राप्त किये जा सकते हैं , जिससे विषय की पूर्णता एवं समग्रता सम्भव होती है ।

3. विषयगत् प्रस्तुतीकरण ( Subject presentation ) -

प्रत्येक विषय के प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया में भी समाकलन की आवश्यकता अनुभव की जाती है । इसमें सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी का ही योगदान माना जाता है । वर्तमान समय में बालकों के समक्ष प्रकरण एवं विभिन्न विषयों के प्रस्तुतीकरण का समाकलित स्वरूप का श्रेय भी सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी को ही जाता है क्योंकि इसके माध्यम से प्रस्तुतीकरण के सर्वमान्य तरीकों का ज्ञान सम्भव होता है ।

4. शिक्षण विधियों का समाकलन ( Integration of teaching methods )-

वर्तमान समय में विभिन्न विषयों के शिक्षण में शिक्षण विधियों का समाकलित स्वरूप पाया जाता है । वर्तमान समय में उस विधि को सर्वोत्तम माना जाता है , जिसमें करके सीखने की व्यवस्था का प्रावधान होता है । सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी के माध्यम से विधियों के सन्दर्भ में समाकलित एवं समग्र विचार दैनिक तकनीकी विश्लेषण प्राप्त किये जा सकते हैं , जिससे विधियों में समाकलन की स्थिति उत्पन्न होती है ।

5. सैद्धान्तिक समाकलन ( Theoritical integration ) -

विषयगत् सिद्धान्तों में समाकलन की स्थिति भी सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी की ही देन है । आज विभिन्न विषयों के शिक्षण सिद्धान्तों में एकरूपता पायी जाती है ; जैसे - उपयोगिता का सिद्धान्त एवं क्रियाशीलता का सिद्धान्त आदि । जब तक छात्र के लिये कोई विषय उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण नहीं होगा तब तक उसको उस विषय में कोई रुचि नहीं होगी । इसी प्रकार छात्रों को क्रियाशील रखने के सिद्धान्त का अनुकरण किया जाता है ।

पेंडिंग केसेस का बोझ. सायबर क्राइम 4 साल में 17 गुना बढ़ा; भोपाल में 257 FIR, 70 हजार शिकायतें; पर जांच अधिकारी सिर्फ दो

स्टेट सायबर सेल की भोपाल यूनिट से हाल ही में 10 आईओ को कर दिया रिलीव। - Dainik Bhaskar

मप्र में बढ़ते सायबर अपराधों को सुलझाने की कोशिशों के बीच स्टेट सायबर सेल शिकायतों की लंबी फेहरिस्त के बोझ तले दबी हुई है। पिछले 4 साल में ही सायबर क्राइम के केस 17 गुना बढ़ चुके हैं, लेकिन स्टेट सायबर सेल की भोपाल यूनिट में इन दिनों केवल दो इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (आईओ) हैं।

इयर एंड में इन्हीं दो आईओ के भरोसे 70 हजार से ज्यादा शिकायतों और 257 एफआईआर के निपटारे की जिम्मेदारी है। ऐसा तब है, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भोपाल दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सायबर अपराधों पर लगाम लगाने की सलाह पुलिस अफसरों को दे चुके हैं।

हालात तो ये हैं कि राज्य सायबर सेल में आई शिकायतों को जिलों में दैनिक तकनीकी विश्लेषण ट्रांसफर किया जा रहा है। जिला पुलिस को हवाला दिया जा रहा है कि हम आपकी तकनीकी मदद कर देंगे, विवेचना आप ही करवा लें। राज्य सायबर सेल के 10 आईओ को हाल ही में रिलीव कर दिया गया है। इसके बाद भी पुलिस मुख्यालय और राज्य सरकार रोजाना ठगे जा रहे सैकड़ों लोगों को लेकर गंभीर नहीं है। सायबर सेल में एसआई और सिपाही स्तर पर 57 पदों पर भर्ती की अनुशंसा 23 महीने से लंबित है।

इन कमियों की वजह से हमारी पुलिस से आगे हैं सायबर ठग

1 यहां स्टाफ की बहुत कमी है। न यहां कोई विशेष भत्ता मिलता है और न ही यहां बने रहने की कोई तय समय सीमा है।

2 यहां ट्रांसफर होकर आने वाला स्टाफ जल्द से जल्द यहां से निकलने की जुगत में लगा रहता है।

3 सायबर अपराधों की अच्छी विवेचना और ठगे जा रहे लोगों को न्याय दिलाने की बातें केवल बयानों में ही नजर आती हैं।

4 सायबर अपराधों की बेहतर विवेचना के लिए जरूरी तकनीकी उपकरण भी यहां कम ही हैं। नेटवर्क फॉरेंसिक के लिए टीम को नए सॉफ्टवेयर की जरूरत है।

इन्वेस्टिगेशन जटिल. क्योंकि कई दिन चलता है एनालिसिस
किसी भी सायबर अपराध का इन्वेस्टिगेशन आईपीसी अपराध से ज्यादा जटिल होता है। दरअसल ऐसे ज्यादातर अपराधों के आरोपी शहर, प्रदेश या देश के बाहर बैठकर अपराध कर रहे हैं। उनकी धरपकड़ से पहले कई दिनों का लंबा तकनीकी विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद धरपकड़ में भी टीम को 3-4 दिन वहां रुकना भी पड़ता है।

बीते 4 साल में. 4000 से 70 हजार हुईं शिकायतें

4 साल में सायबर अपराध 17.5 गुना तक बढ़ गए हैं। राज्य सायबर सेल में 2018 में 4000 शिकायतें दर्ज हुई थीं। 2019-20 में कोरोना के दौरान लोगों ने इंटरनेट का यूज ज्यादा किया। ऐसे में सायबर अपराध भी बढ़े। जनवरी 2022 से अब तक यहां सायबर अपराध से जुड़ीं 70 हजार शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें नेशनल हेल्पलाइन पर आई शिकायतें भी हैं।

मैनपॉवर बढ़ाने की कोशिशें कर रहे हैं

सायबर अपराधों की बेहतर विवेचना के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते रहे हैं। बल और उपकरण बढ़ाने की कोशिशें पुलिस मुख्यालय स्तर पर की जा रही हैं।
-योगेश देशमुख, एडीजी सायबर

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