बीएलओ (BLO) क्या होता है- BLO Full Form, बीएलओ का पूरा नाम हिंदी में

जैसे कि आप जानते हैं देश के चुनाव जब नजदीक आते हैं तो सभी नेताओं के लिए चुनाव से संबंधित कुछ कठिनाइयां खड़ी हो जाती हैं। जिसके माध्यम से उन्हें चुनाव को अंत तक ले जाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है। इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए चुनाव आयोग ने चुनाव क्षेत्रों में BLO की नियुक्ति कर दी है। इसके माध्यम से चुनाव में आने वाली सभी समस्याओं को पहले से सुलझा लिया जाता है जिससे चुनाव आयोग की प्रक्रिया सही से पूरी हो जाती है। आइए आज हम आपको अपने आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे कि BLO क्या होता है? उसकी फुल फॉर्म क्या होती है? कैसे बने, कार्य, वेतन और योग्यता की पूरी जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं तो आप हमारी इस पोस्ट को अंथ तक जरूर पढ़े।

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बीएलओ क्या है?- BLO Kya Hai

बीएलओ की फुलफॉर्म BOOTH LEVEL OFFICER होता है। इसको हिंदी भाषा में बूथ स्तर अधिकारी कहा जाता है। इनका काम होता है कि चुनाव आयोग द्वारा जमीनी स्तर पर क्षेत्रों में चुनाव को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएं। चुनाव आयोग कि हमेशा यही कोशिश रहती है कि भारत में चुनाव की प्रक्रिया बहुत सरल तरीके से हो जाए जिसके लिए चुनाव आयोग यह चाहते हैं कि चुनाव के समय हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत हो सके। जिससे वे मतदाताओं का उचित मार्गदर्शन करने में सफल हो सके और चुनाव की पूरी प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी से ही सफलता पूर्वक पूरा करे। इसी चीज को मध्य नजर रखते हुए चुनाव आयोग सभी चुनाव क्षेत्रों में बीएलओ का चुनाव करते हैं। बीएलओ की नौकरी सरकारी नौकरी और अर्ध सरकारी नौकरी होती है।

BLO के पद पर जो व्यक्ति होते हैं उन्हें चुनाव क्षेत्र के विषय में संपूर्ण जानकारी दी जाती है ताकि वे क्षेत्रीय जानकारी का प्रयोग करके किसी निश्चित छेत्र में चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करवा सकें।

बीएलओ

बीएलओ केसे बनते हैं?

BLO बनने के लिए नागरिक को चुनाव से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी होनी बहुत ही आवश्यक होती है, क्योंकि एक बीएलओ की नौकरी करने वाले व्यक्ति से चुना से सम्बंधित ही कार्य करने होते है। इसके आलावा उसे समाज के विषय में भी अधिक जानकारी रखने की आवश्यकता होती है, जिससे उसे अपनी नौकरी करने में बहुत अधिक सहायता मिल सकती हैं। बीएलओ का यह पद बड़ा पद होता है, जिसमें व्यक्ति को सम्मान के साथ-साथ अच्छी सैलरी भी प्रदान की जाती है।

BLO के कार्य

  • बूथ लेवल ऑफिसर का मुख्य कार्य यह होता है कि, वह अपने क्षेत्र के सभी मतदाताओं की चुनाव व वोट से सबंधित हर प्रकार की जानकारी से अवगत कराये।
  • बूथ लेवल ऑफिसर ही होता है, जो अपने क्षेत्र के सभी मतदाताओं को चुनाव से सम्बंधित आने वाले सभी समस्याओं का समाधान करता है।
  • कार्ड या चुनाव से संबंधित हर प्रकार की जानकारी बीएलओ फैलता है और आयोग ही प्रदान करता है। इसलिए यदि आपको इस प्रकार की कोई भी समस्या होती है, तो इसके लिए आप अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करके उस समस्या का हल निकाल सकते हैं।

बीएलओ (BLO) क्या होता है

वोटर लिस्ट में नाम शामिल ना होने पर आपको क्या करना चाहिए?

आपका नाम कई वजहों से वोटर लिस्ट से कट सकता है, अगर आपने रहने की जगह बदली है या आप जॉब/कारोबार के सिलसिले में किसी नए शहर में शिफ्ट हो गए हैं, तब भी वोटर लिस्ट से आपका नाम काटा जा सकता है। अगर बूथ लेवल ऑफिसर (फैलता है और आयोग बीएलओ) आपके घर पर मतदाता सूची चेक करने आता है और आपके बारे में उसे सही जानकारी नहीं मिलती है तो भी आपका नाम वोटर लिस्ट से काटा जा सकता है। इसलिए आपको बीएलओ ऑफिसर को सही जानकारी प्रदान करनी है।

बीएलओ का मासिक वेतन

BLO की नौकरी में व्यक्ति को लगभग 7500 रूपए प्रति माह प्रदान की जाती है। लेकिन अभी इस सैलरी को लेकर बीएलओ अधिकारी का कहना है कि यह वर्तमान समय के हिसाब से काफी कम सैलरी है। इसीलिए सारे बीएलओ ऑफिसर अपने सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

बीएलओ (BLO) क्या होता है

बीएलओ के वार्षिक मानदेय

निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्र स्तर के

अधिकारी (बीएलओ) के वार्षिक मानदेय में 2000 रुपये की बढ़ोतरी की है। फैलता है और आयोग अब उन्हें 3000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे।राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत वल्गद 24 अप्रैल को फरीदाबाद में लोकसभा चुनाव की ईवीएम सुरक्षा तथा मतगणना केंद्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए आए थे। तभी विधानसभा क्षेत्र के

सहायक निर्वाचन फैलता है और आयोग अधिकारी एवं जिला पंचायत विकास अधिकारी नरेश कुमार पंकज ने बीएलओ को दिए जाने वाले मानदेय को कम बताया था। उसके बाद बीएलओ के वार्षिक मानदेय को बढ़ाकर 5000 रूपए करने का फैसला लिया गया।

बीएलओ बनने के लिए योग्यता

  • बीएलओ पद के लिए वही लोग फैलता है और आयोग पात्र हैं जो किसी सरकारी नाचे का हिस्सा हो या फिर क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति हूं।
  • BLO पद के लिए वह लोग पात्र हैं जिन्हें नियुक्ति प्रोजेक्ट एशियन ऑफ पीपल sec-1950 किस सेक्शन के अंतर्गत की जाती है
  • इस पद के लिए वही पात्र हैं जो जमीनी स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले हो।

शिक्षकों से अब नहीं ली जाएगी बीएलओ की ड्यूटी

प्रदेश में अब शिक्षकों से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी नहीं ली जाएगी। चुनाव आयोग की अोर से इस संबंध में मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिख कर बीएलओ का इस कार्य से मुक्त करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने छह दिसंबर 2007 को एक केस में निर्णय दिया कि शैक्षणिक सत्र में अध्यापक से बीएलओ की ड्यूटी नहीं ली जा सकती। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद भारत सरकार ने 13 सितंबर 2010 को आदेश जारी कर अध्यापकों से स्कूल समय में बीएलओ डयूटी नहीं लेने पर रोक लगाई। इसके बाद भी प्रदेश में 15 हजार शिक्षकों से यह ड्यूटी ली जाती रही है।

भारत में नई राजनीतिक पार्टी कैसे बनाये

भारत में राजनीतिक पार्टी को निर्वाचन आयोग के द्वारा मान्यता प्रदान की जाती है | इसके बाद जिस दल को निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त हो जाती है, तो वह दल चुनाव में भाग लेने के लिए शामिल हो सकता है | इस प्रकार से निर्वाचन आयोग पहले दल को एक छोटी पार्टी के रूप में मान्यता प्रदान करता है, उसके बाद जब उसके संगठन में वृद्धि होती दिखाई देती है और उसे जनता द्वारा अधिक पसंद किया जाता है, तो उसे चुनाव में जीत भी प्राप्त हो जाती है, | इसके बाद निर्वाचन आयोग के नियम के अनुसार वोट प्राप्त कर लेने वाले दल को क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त हो जाती है | फिर यदि उस दल की लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी नजर आती है, और साथ ही में उसे अन्य राज्यों में निर्धारित वोट प्रतिशत प्राप्त हो जाता है, तो उसे एक राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता भी प्रदान कर दी जाती है | इसलिए यदि आप भी भारत में नई राजनीतिक पार्टी बनने के विषय में जानना चाहते हैं, तो यहाँ पर आपको भारत में नई राजनीतिक पार्टी कैसे बनाये, आवेदन शुल्क , नियम की जानकारी प्रदान की जा रही है |

नई राजनीतिक पार्टी (Political Party) कैसे बनाए ?

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भारत में किसी भी राजनीतिक दल को निर्वाचन आयोग के द्वारा मान्यता प्राप्त होती है | इसके बाद यदि आपको चुनाव के लिए नयी राजनीतिक पार्टी तैयार करनी है, तो इसके लिए आपको निर्वाचन आयोग के द्वारा निर्धारित आवेदन पत्र को भरना होगा , लेकिन आवेदन पत्र भरने के लिए आपको सबसे पहले आवेदन पत्र को डाउनलोड करना होगा, जिसके लिए आपको आयोग की वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड करना होगा | इसके अलावा आप इसे आयोग के कार्यालय के काउंटर से भी प्राप्त कर सकते है | यदि आप अपने आवेदन पत्र यहाँ से नहीं प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप इसे डाक के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते है | इस प्रपत्र को पार्टी के लैटर हेड के साथ संलग्न करना बहुत ही आवश्यक होता है |

नई राजनीतिक पार्टी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन शुल्क

भारत में नई राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए जो लोग आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें आवेदन के साथ प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में 10,000/- रू. (दस हजार रूपये केवल) का डिमांड ड्राफ्ट, अपर सचिव, भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के पक्ष में भेजना होता है, जब तक यह रकम उन्हें नहीं भेजी जाएगी तब तक आपकी आवेदन प्रक्रिया सम्पन्न नहीं हो सकेगी |

Year Ender 2022 साल 2022 में Lumpy Virus और फैलता है और आयोग Zika Virus समेत इन 5 बीमारियों ने दुनियाभर में मचाया आतंक, जानें इसके लक्षण

नई दिल्ली : साल 2021 तो शायद ही कोई भूल पाएगा क्योंकि इस साल कोरोना (Corona) का काफी आतंक था। जिसने बच्चों से लेकर बड़ो तक सबको हिला कर रख दिया था। तो वहीं साल 2022 भी इस मामले में कुछ कम नहीं रहा है। इस साल भी जीका वायरस और लंपी वायरस जैसे कई ऐसी बीमारियों सामने आई हैं।

कोरोना वायरस (Corona Virus) की तरह इस साल लंपी वायरस का भी खूब आतंक रहा है। जिसकी वजह से लाखों मवेशियों ने जान गवा दीं। आज हम आपको साल 2022 के उन बिमारियों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका इस साल खूब आतंक रहा है। तो आइए, जानते हैं साल 2022 की टॉप 5 बीमारियों के बारे में।

1. लंपी वायरस –

लंपी वायरस (Lumpy skin disease virus) का आतंक इस साल आपने खूब देखा होगा। आपको बता दें कि यह एक स्किन डिजीज है। जो कि गाय, भैंस और बकरी जैसी जानवरों में फैलता। जो किसी और वजह से नहीं बल्की ये एलएसडी (LSD) वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसों के खून चूसने वाले कीड़ों के कारण फैलता है। इस बीमारी के चलते इस साल भारत में लाखों मवेशियों की जान चली गई।

2. जीका वायरस –

जीका वायरस के मामले तो अभी भी हाल फिलहाल में सामने आ रहे हैं। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत समेत दुनियाभर में जीका वायरस (Zika Virus) का प्रकोप साल 2022 में देखने को मिला। ये वायरस भी मच्छर के काटने से फैलता है। लेमी ये एडीज मच्छर के काटने से होता है। जिससे शरीर में लाल चक्कते, मांसपेशियों में दर्द और बुखार जैसे लक्षणों दिखाई देते हैं।

3. टोमैटो फ्लू वायरस –

टोमैटो फ्लू वायरस (Tomato Flu Virus) ने इस साल व्यापक तौर पर बच्चों को अपना शिकार बनाया। टोमैटो फ्लू वायरस के शुरुआती लक्षण कोरोना वायरस जैसे हैं। ये वायरस कॉक्ससैकीवायरस A16 के कारण होती है। इसमें हाथ, पैर और मुंह की बीमारी का कारण बनता है।

4. मंकीपॉक्स –

सेक्सुअल कांटेक्ट से तेजी से फैलने वाला वायरस मंकीपॉक्स (Monkey pox) इस साल यानी साल 2022 में दुनियाभर में सबसे चर्चित बीमारियों में से एक रहा है। ये वायरस वैरियोला वायरस, के वजह से फैला। इसने लगभग 90 देशों को अपना शिकार बना लिया था। इसमें लोगों के शरीर पर खासकर के निजी अंगों पर दाने देखे गए।

5. निपाह वायरस –

जानवरों से इंसानों में तेजी से फैलने वाला वायरस निपाह वायरस (Nipah Virus), एक जूनोटिक बीमारी है। जो भारत में केरल और दक्षिण के राज्यों में तेजी से फैली। ये बीमारी चमगादड़ या सूअर, या उनके शरीर के तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आने से फैली। इस बीमारी में बुखार, सांस लेने में तकलीफ, दिमागी बुखार, मांसपेशियों में दर्द, स्ट्रोक, उल्टी और गले में खराश जैसी समस्याएं सामने आई।

राज्य महिला आयोग/Rajasthan women Commission


महिला सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संधि भी पारित की गई है जिससे (महिला भेदभाव के उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 1979) के नाम से जाना जाता है। भारत द्वारा इस संधि पर 1993 में हस्ताक्षर किए गए थे।


समय के साथ-साथ महिलाओं की सशक्तिकरण के क्षेत्र में धीमी गति से होते हुए कार्य तथा बढ़ते अपराधों को देखकर भारत सरकार द्वारा भी राष्ट्रीय महिला नीति 1996 जारी की गई। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महिला आयोग तथा राज्यों के लिए राज्य महिला आयोग हेतु अधिनियम पारित किया गया।

राजस्थान में प्रारंभ से ही महिलाओं की स्थिति दयनीय रही है जिसका प्रमुख कारण क्षेत्र में व्याप्त अशिक्षा रीति रिवाज तथा सामाजिक बंधन रहे हैं। इसी को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा 1999 में राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम पारित किया गया।

इसी अधिनियम की धारा 3 के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर 15 मई 1999 को राजस्थान राज्य महिला आयोग फैलता है और आयोग का गठन किया गया। राज्य में महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च 2000 को राज्य महिला नीति भी घोषित की गई।


आयोग के सदस्यों में से एक महिला अनुसूचित जाति अथवा जनजाति तथा एक अन्य सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग से होना आवश्यक है।


सदस्य सचिव की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है जो कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होता है।

आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष निर्धारित किया गया है, हालांकि सदस्य तथा अध्यक्ष चाहे तो समय पूर्व भी लिखित में त्याग पत्र दे सकते हैं।

महिलाओं से संबंधित प्रचलित कानूनों की समीक्षा और महिलाओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से सरकार से संशोधन का अनुरोध करना

महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए सरकार से सिफारिश करना।

अध्यक्ष-श्रीमती सुमन शर्मा
सदस्य- डॉ. रीटा भार्गव
सदस्य-श्रीमती सुषमा कुमावत
सदस्य-श्रीमती अरुणा मीणा
अधिकारी-सदस्य सचिव श्रीमती अमृता चौधरी

श्रीमती सुमन शर्मा 20-10-2015 से 19-10-2018
प्रो लाड कुमारी जैन24-11-2011 से 23-11-2014
डॉ सरिता सिंहकार्यवाहक 24-03-2011 से 23-11-2011
श्रीमती मीरा महर्षिकार्यवाहक17-10-2009 से 18-08-2010
श्रीमती तारा भंडारी 15-04-2006 से 14-04-2009
प्रो पवन सुराना28-01-2003 से 27-01-2006
श्रीमती कांता कथूरिया25-05-1999 से 24-05-2002

महिला आयोग ने मार्च 2016 के अपने निर्णय के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर महिला पंचायत के गठन का प्रावधान किया है। इसकी कार्यवाही वर्तमान में राज्य सरकार के पास प्रक्रियाधीन है।

अप्रैल 2018 में पूरे राज्य में शुरू किए गए इस मिशन के अंतर्गत राज्य की कॉलेज की छात्राओं कोइसके अंतर्गत राज्य की कॉलेज की छात्राओं को पिंक बेल्ट क्लब से जोड़ कर शारीरिक मानसिक तथा विधिक रुप से सशक्त बनाना है। इसके लिए प्रत्येक कॉलेज की चुनी गई छात्राओं को आत्मरक्षा हेतु शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मार्च 18 में आयोजित इस सम्मान समारोह में चिकित्सा, खेल, समाज सेवा, तथा महिला उत्थान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाली 24 महिलाओं को प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।

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