RBI Governor Shaktikanta Das: आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास। (PTI/File photo)।

Cryptocurrency पर बैन क्यों लगाना चाहती है सरकार? सामने आई ये वजह

Cryptocurrency पर बैन क्यों लगाना चाहती है सरकार? सामने आई ये वजह आधिकारिक डिजिटल करेंसी नियमन विधेयक 2021 (The Regulation of Official Digit.

Cryptocurrency पर बैन क्यों लगाना चाहती है सरकार? सामने आई ये वजह

आधिकारिक डिजिटल करेंसी नियमन विधेयक 2021 (The Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021) को संसद के बजट सत्र में पेश किये जाने की संभावना है. प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी (Private Cryptocurrency) पर बैन के लिए करेंसी बिल पारित हो जाता है, तो क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन और करेंसी गैरकानूनी होगा

देश में सभी तरह की प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी (Private Cryptocurrency) पर बैन लग सकता है. इसके लिए सरकार संसद में एक बिल लाने की तैयारी में है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सरकार अपनी खुद की सॉवरेन डिजिटल करेंसी लाना चाहती है. इसीलिए क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन की बुनियाद मोदी सरकार जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) कर पहले ही रख चुकी है.

क्या है सरकार का प्लान?

प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन के लिए करेंसी बिल पारित हो जाता है, तो क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन और करेंसी गैरकानूनी होगा यानी कि क्रिप्टोकरेंसी का भुगतान सिस्टम से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा. इसके लिए आधिकारिक डिजिटल करेंसी नियमन विधेयक 2021 (The Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021) को संसद के बजट सत्र में पेश किये जाने की संभावना है. हालांकि इससे पहले RBI ने बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन करने पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध हटा दिया था.

RBI की है ये तैयारी

इस बाबत 25 जनवरी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है को जारी आरबीआई बुकलेट में भी कहा गया था कि केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी पर विचार कर रहा है. जल्द ही इस पर फैसला हो सकता है. RBI के डिप्टी गवर्नर बीपी कानूनगो की तरफ से जारी बयान में कहा गया था, 'एक इंटरनल कमिटी डिजिटल करेंसी जारी करने के तौर-तरीकों पर अध्यन कर रही है. जल्दी ही इस बारे में अपनी रिपोर्ट देगी.'

दूसरी तरफ मार्च 2020 तक देश में 122 करोड़ से ज्यादा आधार कार्ड प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है जारी किए जा चुके हैं. 96 करोड़ से अधिक बैंक खाते आधार से जोड़े जा चुके हैं. इस लिहाज से देश में डिजिटल करेंसी जारी करने के लिए नेटवर्क पूरी तरह तैयार है. आरबीआई पहले ही रीटेल इनवेस्टर्स को अपने ई-कुबेर सेटअप में अकाउंट खोलने की अनुमति दे चुकी है. यह कदम भी डिजिटल करेंसी जारी करने की प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है तैयारी की दिशा में माना जा रहा है.

जानकार क्या मानते हैं?

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को की कंपनी सैंटियागो कैपिटल के सीईओ Brent Johnson ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, 'आधार प्रोजेक्ट लाया ही इसलिए गया था कि हर किसी का सरकार के पास अकांट हो और उनको अपनी आईडी और पेमेंट्स की सुविधा हो. इसी कारण सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर बैन कर सकती है.'

क्या Cryptocurrency India में बंद हो जाएगी?Cryptocurrency ban in India Hindi

भारत सरकार (Indian Government) क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर बिल लाने की तैयारी कर रही है।

Cryptocurrency Bill India 2021

बिल का नाम ‘The Cryptocurrency & Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021’ है।

अगली मंदी कैसे आएगी. क्या कारण रहेगा? RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने समझाया पूरा खेल

RBI Governor On Crypto: रिजर्व बैंक के गवर्नर Shakti Kant Das लंबे समय से प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ रहे हैं और एक बार फिर से उन्होंने इकोनॉमी पर इसके खतरे के बारे में आगाह किया है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान इसे वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा करार दिया है।

नई दिल्ली। मंदी (Recession) का खतरा दुनिया पर मंडराने की खबरें लंबे समय से चर्चा में हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये मंदी कैसे और किस वजह से आएगी? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shakti Kant Das) की मानें तो अगला वित्तीय संकट प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के कारण आएगा। बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बड़ी टिप्पणी की है। इसके साथ ही उन्होंने देश की इकोनॉमी को लेकर भी बड़ी बात कही है।

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वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर (RBI Governor) शक्ति कांत दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि निजी क्रिप्टोकरेंसी (Privet Cryptocurrencies) का कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं है और व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक है और बड़ा जोखिम पैदा करता है। इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आरबीआई पहले भी इसी तरह की अपनी राय कई बार रख चुका है और हमेशा से ही इसके खिलाफ रहा है।

RBI गवर्नर ने दोहराई अपनी बात
आरबीआई गर्वनर पहले भी कह चुके हैं कि इससे देश की व्यापक आर्थिक (Macro Economic) और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। अब एक बार फिर से उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने BFSI Insight Summit 2022 के दौरान अपने संबोधन में कहा कि अगर निजी क्रिप्टोकरेंसी को रोका नहीं गया तो Economy अगले संकट में फंस सकती है।

'प्राइवेट क्रिप्टो को वैध करना उचित नहीं'
शक्तिकांत दास ने कहा कि प्राइवेट क्रिप्टो का मतलब है कि इन पर किसी केंद्रीय नियामक का नियंत्रण नहीं है। ऐसे में इसका इस्तेमाल वैध करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। गौरतलब है कि इन दिनों क्रिप्टो मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। टॉप-10 क्रिप्टोकरेंसी के दाम में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Bitcoin) प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है का दाम गिरकर 16,862 डॉलर पर आ गया है। वहीं इथेरियम (Etherium) 1,214 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

बाहरी कारकों से इकोनॉमी को खतरा
कार्यक्रम के दौरान RBI Governor ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कहा कि भारत प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है की अंतर्निहित आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और आने वाले समय में भी इनके मजबूत बने रहने की पूरी संभावना है। हालांकि, उन्होंने इस बात की भी आशंका जाहिर की है कि देश के बाहरी कारक इंडियन इकोनॉमी को कुछ हद तक नुसकान जरूर पहुंचा सकते हैं। इनमें जियो पॉलिटिकल तनाव और वैश्विक मंदी (Globle Recession) की आशंका भी शामिल हैं।

पर बैन! जानिए कौन सी मुद्रा कहलाती है प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी, जिस पर नहीं है RBI का बस

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Cryotocurrency को भारत में वैध बनाने की प्रक्रिया के बीच केंद्र सरकार इस Parliament Winter Session में एक बड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही है। लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक निचले सदन में पेश किए जाने वाले Bills की लिस्‍ट में प्राइवेट क्रिप्टोकरंसी बिल है

Cryptocurrency ब्‍लॉकचेन तकनीक पर काम करती है।

नई दिल्‍ली,। Cryotocurrency को भारत में वैध बनाने की प्रक्रिया के बीच केंद्र सरकार इस Parliament Winter Session में एक बड़ा बिल लाने की तैयारी कर रही है। लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक निचले सदन में पेश किए जाने वाले Bills की लिस्‍ट में प्राइवेट क्रिप्टोकरंसी और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021 (The Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021) लिस्‍टेड है। यहां प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी (Private Cryptocurrency) शब्‍द पर ध्‍यान देने की जरूरत है।

बता दें कि भारत में अभी Cryptocurrency को लेकर कोई पाबंदी नहीं है। भारतीय निवेशकों ने इसमें काफी रकम लगा रखी है। लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक सरकार बिल लाकर रिजर्व बैंक को यह अधिकार देगी कि वह अपनी डिजिटल करंसी ला सके और उसकी रूपरेखा तैयार कर सकेगा। इसके साथ ही Private Cryptocurrency को बैन किया जाएगा। यानि Bitcoin, Ether, binance coin, solana और dogecoin, Monero, Dash जैसी आभासी मुद्रा में खरीद-फरोख्‍त करने पर पाबंदी

क्‍या है Private Cryptocurrency

सरकार की तरफ से अभी यह साफ नहीं है कि वह किस Private Cryptocurrency की बात कर रही है। हालांकि Bitcoin, Ether या दूसरी आभासी मुद्राएं भी एक तरह की प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी है, जिसे कोई सेंट्रल बैंक या सरकार नियंत्रित नहीं करते हैं। Bitocoin और दूसरी करंसी अनजान और ट्रेस न किए जा सकने वाले ट्रांजैक्शन की अनुमति देती हैं। कोई भी सरल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए Bitcoin बना सकता है

Monero-Dash भी प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी

Monero, Dash और दूसरे Crypto token भी प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी में आते हैं। इन प्राइवेट क्रिप्‍टोकरंसी में यूजर की प्राइवेसी बनी रहती है। उसका डेटा सुरक्षित रहता है। इसे प्राइवेट टोकन भी कहते हैं।

कैसे करती है काम

Cryptocurrency की बात करें तो यह एक तरह की Private virtual currency है। यह जिसके पास भी है वह उसका मालिक है। मसलन Bitcoin या Ether, जिनकी मार्केट वैल्‍यू काफी ज्‍यादा है। 1 Bitcoin की कीमत 60 हजार डॉलर के आसपास है। इन करंसी में खरीद-फरोख्‍त पब्लिक लेजर के जरिए होती है। इसमें कोई भी भाग ले सक

क्‍या है ब्‍लॉकचेन

Cryptocurrency ब्‍लॉकचेन तकनीक पर काम करती है। यह एक डिजिटल फाइल है, जिसे किसी भी सूरत में एमेंड नहीं किया जा सकता। डेटा वितरण के लिए यह Peer to peer mechanism पर काम करती है। मसलन अगर कोई यूजर दूसरे साथी को 20 यूनिट ट्रांसफर करना चाहता है तो ऐसे ट्रांजैक्‍शन में बैंक या केंद्रीय इकाई नियंत्रण करती है। लेकिन Blockchain में कोई केंद्रीय नियामक नहीं होता। हर यूजर को डिजिटल प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है फाइल पर नियंत्रण होता है।

Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट नहीं किया गया तो खड़ा हो सकता है नया आर्थिक संकट, आरबीआई गवर्नर की चेतावनी

RBI Governor Shaktikanta Das: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने नए आर्थिक संकट को लेकर आशंका जताई है।

Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट नहीं किया गया तो खड़ा हो सकता है नया आर्थिक संकट, आरबीआई गवर्नर की चेतावनी

RBI Governor Shaktikanta Das: आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास। (PTI/File photo)।

RBI Governor Shaktikanta Das: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने बुधवार (21 दिसंबर, 2022) को मुंबई में एक कार्यक्रम में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर अपनी राय व्यक्त की। दास कहा कि प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी की वजह से अगला वित्तीय संकट आ सकता है। आरबीआई गवर्नर ने प्राइवेट क्रिप्टो को इसका दोषी ठहराया। ऐसा इसलिए क्योंकि उनसे मैक्रो इकोनॉमिक और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा होता है।

शक्तिकांत दास ने चेतावनी दी कि क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने में विफल रहने से अगले वित्तीय संकट को बढ़ावा मिल सकता है और उन्होंने डिजिटल बैंकिंग जरूरतों के लिए एक नया ई-रुपया अपनाने का आग्रह किया। दास ने कहा कि आरबीआई के लिए एक मुख्य चिंता यह है कि क्रिप्टोकरेंसी का कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं है।

बिजनेस स्टैंडर्ड BFSI इनसाइट समिट में दास ने दिवालिया क्रिप्टो एक्सचेंज एफटीएक्स का उदाहरण भी दिया। एफटीएक्स के पूर्व सीईओ सैम बैंकमैन- फ्राइड को पिछले हफ्ते बहामास में उनके पेंटहाउस से अरेस्ट किया गया था। बैंकमैन- फ्राइड पर अमेरिकी अधिकारियों द्वारा इक्विटी निवेशकों को धोखा देने का आरोप लगाया गया है।

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भारत के केंद्रीय बैंक ने निजी क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से इनकार कर दिया है और बार-बार उनमें ट्रेडिंग के खिलाफ चेतावनी जारी की है। दास ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अधिक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं को अपनाएंगे, क्योंकि वे निजी क्रिप्टोकरेंसी को छोड़ देते हैं। भारत के केंद्रीय बैंक ने इस महीने की शुरुआत में खुदरा उपयोग के लिए अपनी डिजिटल मुद्रा का परीक्षण किया।

बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट में बोलते हुए दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था में ऊंची कीमतों को कम करना सभी के हित में है और सरकार और केंद्रीय बैंक “मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए गंभीर हैं।” उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति राजनीति या आगामी राष्ट्रीय चुनावों से प्रेरित नहीं है, जो 2024 के लिए निर्धारित हैं। इसके बजाय, आरबीआई “केवल मुद्रास्फीति और विकास को देख रहा है।”

इस महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति की समीक्षा में, केंद्रीय बैंक ने प्रमुख दर में 35 आधार अंकों की वृद्धि की, जो कि महीनों में सबसे कम उछाल है। मई के बाद से, आरबीआई ने 2% -6% के लक्ष्य बैंड के भीतर अत्यधिक उच्च मुद्रास्फीति को लाने के लिए अपनी नीति दर में 225 अंक की वृद्धि की है।

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